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mahobbat lihaz nahi karti......
मीलों का सफर नाप के मेरी याद तुम तक पहुँच गई, कम्बक्थ महोब्बत फसलों का लिहाज़ नही करती.
मेरे दिल की हर तह पे आहट तुम्हारी ही मिलेगी, यार! ये महोब्बत तो गहराइयों का भी लिहाज़ नही करती.
दिसम्बेर की सर्द रातों मे भी आंखो से बरसात होती रही, ये महोब्बत तो मौसम का भी लिहाज़ नही करती.
माँ की गोदी की थपकियाँ मुझे बहुत याद आती है ये महोब्बत तो किसी की मजबूरियों का भी लिहाज़ नही करती. साथ जो होते है तो दिल के अरमान बयां नही कर पाते, लेकिन खुश है हम की हमारी महोब्बत दिखावों के लीबाज़ नही ओडती.....
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