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मैं.......
तस्सव्वुर के धागों से ख्वाब बुनता हूँ मैं, यादों के गुलशन से कुछ फूल चुनता हूँ मैं.
फ़लक के काग़ज़ पे रोज़ लिखता ओर मिटाता हूँ मेरे हिस्से की जन्नत अपने हाथों से बनाता हूँ.
चेहरों के इस दरिया मे मैं ज़र्रा-ए-साहिल हूँ, तनहाई मेरी हमसफ़र और मैं ही मेरी मंज़िल हूँ
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